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November 3, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

झारखंड में बारिश का संकट गहराया, सामान्य से 38% कम वर्षा; सिर्फ 18% क्षेत्र में हुई फसल

झारखंड में खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत किसानों के लिए भारी संकट और चिंता लेकर आई है। 19 जुलाई 2026 तक राज्य में औसतन सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इस कम बारिश का सीधा और बुरा असर धान की बुआई व रोपनी पर पड़ा है। प्रदेश में तय किए गए लक्ष्य के मुकाबले अब तक महज 18.06 प्रतिशत हिस्से में ही फसल लगाई जा सकी है, जबकि धान की रोपनी का आंकड़ा सामान्य का केवल 13.7 प्रतिशत ही पहुंच पाया है।

सबसे अधिक दयनीय हालत पलामू और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की है, जहां कई जिलों में पानी की भारी किल्लत के चलते किसान अब भी मूसलाधार बारिश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, कोल्हान प्रमंडल में स्थिति अन्य प्रमंडलों के मुकाबले थोड़ी बेहतर नजर आ रही है।

उत्तरी छोटानागपुर में हालात चिंताजनक

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले हजारीबाग, रामगढ़, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो और धनबाद जिलों में स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। चतरा जिले में सामान्य से 68 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जो पूरे राज्य में सबसे दयनीय स्थितियों में से एक है। इस पूरे प्रमंडल में अब तक मात्र 14 फीसदी कृषि योग्य भूमि पर ही फसल की रोपनी हो सकी है।

दक्षिणी छोटानागपुर में भी कम बारिश

दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल (जिसमें रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिले शामिल हैं) में भी औसत से लगभग 49 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। कम पानी के कारण इस प्रमंडल के केवल 13 फीसदी खेतों में ही रोपनी का काम हो पाया है।

कोल्हान में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति

पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां वाले कोल्हान प्रमंडल में स्थिति राज्य के अन्य हिस्सों से थोड़ी राहत देने वाली है। यहां सामान्य से करीब 32 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। पूर्वी सिंहभूम में 36.4 फीसदी और सरायकेला में 40.8 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई, जो अन्य प्रमंडलों की तुलना में बेहतर है।

पलामू प्रमंडल सबसे ज्यादा प्रभावित

पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों से मिलकर बने पलामू प्रमंडल में सूखे का सबसे विकराल रूप देखा जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पलामू में 62 प्रतिशत, गढ़वा में 71 प्रतिशत और लातेहार में 56.8 प्रतिशत वर्षा घाटा रिकॉर्ड किया गया है। यहां धान की बुआई काफी पिछड़ गई है, हालांकि मक्का तथा अन्य वैकल्पिक फसलों की स्थिति कुछ हद तक ठीक बताई जा रही है।

संताल परगना में भी गंभीर स्थिति

संताल परगना प्रमंडल (दुमका, देवघर, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज) में औसत से लगभग 34 प्रतिशत कम पानी बरसा है। इसके परिणामस्वरूप प्रमंडल के केवल 15 फीसदी खेतों में ही बुआई/रोपनी पूरी हो सकी है।

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