रांची में सामान्य से 11% कम बारिश का असर, डैम का जलस्तर बढ़ा, फिर भी पिछले साल से 10 फीट कम

झारखंड की राजधानी रांची में इस बार मॉनसून की धीमी गति के बावजूद हाल ही में हुई वर्षा से शहर को पानी सप्लाई करने वाले मुख्य जलाशयों के जलस्तर में कुछ सुधार हुआ है। रूक्का, कांके (गोंदा) और हटिया डैम के वाटर लेवल में आंशिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, शहर में पानी की किल्लत को देखते हुए यह खबर थोड़ी राहत देने वाली जरूर है, मगर आने वाले समय के लिए चिंता अभी पूरी तरह टली नहीं है।
राजधानी में पिछले दिनों हुई मानसूनी बारिश के चलते जलापूर्ति करने वाले तीनों प्रमुख बांधों के जलस्तर में कुछ इंच और फीट की बढ़ोतरी हुई है। रूक्का और गोंदा डैम में पानी का स्तर करीब दो-दो फीट ऊपर आया है, जबकि हटिया डैम में एक फीट की वृद्धि देखी गई है। राहत की इस खबर के बीच एक चिंताजनक पहलू यह है कि इस सीजन में 1 जून से लेकर 12 जुलाई तक रांची में सामान्य के मुकाबले 11 फीसदी कम बरसात हुई है। यही कारण है कि पिछले वर्ष की इसी समय-सीमा की तुलना में इस बार इन बांधों का जलस्तर 5 से लेकर 10 फीट तक नीचे बना हुआ है।
रूक्का डैम में जलापूर्ति योग्य सात फीट आठ इंच पानी
रांची की लगभग 80 प्रतिशत जनता की प्यास बुझाने वाले रूक्का (गेतलसूद) डैम का मौजूदा वाटर लेवल 21 फीट 8 इंच रिकॉर्ड किया गया है। अगर पिछले साल 12 जुलाई के आंकड़ों पर नजर डालें, तो उस समय यहां 32 फीट 4 इंच पानी मौजूद था। इसका मतलब है कि इस वर्ष गेतलसूद डैम में पिछले साल की अपेक्षा करीब 10 फीट कम पानी है। 36 फीट की कुल जल भराव क्षमता वाले इस डैम में अपनी क्षमता से 14 फीट कम पानी है, जिसमें से केवल 7 फीट 8 इंच पानी ही वर्तमान में सप्लाई करने लायक बचा है।
गोंदा डैम में क्षमता से आठ फीट कम है पानी
कांके स्थित गोंदा डैम का मौजूदा जलस्तर 20 फीट 1 इंच मापा गया है। बीते साल 12 जुलाई 2025 को इस जलाशय में पानी का स्तर 26 फीट 6 इंच तक था। इस प्रकार, इस बार यहां पानी करीब 8 फीट कम है। 28 फीट की अधिकतम जल भराव क्षमता वाले इस डैम में अपनी कुल क्षमता से लगभग 8 फीट कम पानी बचा है। लगातार हो रही रिमझिम फुहारों से थोड़ी रिकवरी जरूर हुई है, पर हालात अभी सामान्य नहीं कहे जा सकते।
रांची में औसत से 11 प्रतिशत कम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी रांची में 1 जून से अब तक महज 251.07 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसकी तुलना में पिछले वर्ष इसी समय तक 550 मिमी वर्षा हो चुकी थी। रांची में इस अवधि के दौरान आमतौर पर औसतन 284 मिमी बारिश होनी चाहिए, जिससे स्पष्ट होता है कि इस बार मानसून की बारिश औसत से 11 फीसदी कम रही है।
गाद से रूक्का और कांके डैम की भंडारण क्षमता घटी
रूक्का और कांके दोनों ही बांधों में भारी मात्रा में कीचड़ और गाद (Silt) जमा होने के कारण इनकी वास्तविक जल भंडारण क्षमता काफी घट चुकी है। गोंदा डैम की कुल क्षमता तो 36 फीट है, लेकिन इसमें लगभग 14 फीट तक गाद भर चुकी है। ऐसे में पानी का स्तर इससे नीचे जाने पर सप्लाई बंद करनी पड़ती है। यही स्थिति कांके डैम की भी है, जहां 28 फीट की क्षमता में 7 फीट सिर्फ गाद है, जिसके कारण 7 फीट से कम पानी होने पर सप्लाई रोकनी पड़ती है।
हटिया डैम का जलस्तर पिछले साल से साढ़े पांच फीट कम
हटिया डैम में वर्तमान समय में पानी का स्तर 27 फीट 7 इंच है। पिछले साल इसी तारीख (12 जुलाई) को यह 32 फीट 11.5 इंच पर था। इस हिसाब से इस बार बांध में लगभग साढ़े पांच फीट पानी कम है। 39 फीट की कुल क्षमता वाले इस जलाशय में अभी अपनी फुल कैपेसिटी से 11 फीट 5 इंच कम पानी उपलब्ध है।
जलापूर्ति से हर रोज एक इंच कम होता है पानी
शहर की विशाल आबादी को प्रतिदिन पानी की सप्लाई करने के कारण रांची के इन तीनों बांधों का जलस्तर रोजाना औसतन एक इंच तक घट जाता है। रूक्का, हटिया और कांके जलाशयों के जरिए राजधानी के लगभग पांच लाख नागरिकों के घरों तक पीने का पानी पहुंचाया जाता है।
